छोटी दीवाली को ‘नरक चतुर्दशी’ या ‘रूप चौदस’ भी कहा जाता है, और यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की चौदस को मनाया जाता है। यह दीवाली के एक दिन पहले आता है और इसे ‘छोटी दीवाली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन की परंपराएं और अनुष्ठान मुख्य दीवाली के समान ही होते हैं, लेकिन यह पर्व विशेष रूप से नरक से मुक्ति और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। इसे रूप और स्वास्थ्य की पूजा का दिन भी माना जाता है। इस दिन घरों में दीयों की रौशनी से अंधकार मिटाने और शरीर व मन की शुद्धि के लिए कई अनुष्ठान किए जाते हैं।
इसे जरूर पढ़ें: स्वस्तिक, 9 निधियाँ और ऋद्धि-सिद्धि का महत्व
स्नान और उबटन की परंपरा
छोटी दीवाली के दिन सुबह विशेष उबटन और स्नान की परंपरा होती है। इस दिन की शुरुआत उबटन से की जाती है, जो शरीर की शुद्धि और सौंदर्य के लिए माना जाता है। लोग आटे, तेल और हल्दी का मिश्रण बनाते हैं, जिसे उबटन कहा जाता है। इस उबटन को शरीर पर लगाकर शरीर की मृत कोशिकाओं को हटाया जाता है और त्वचा को निखारा जाता है। यह उबटन लगाने के बाद लोग स्नान करते हैं। इस अनुष्ठान का महत्व है कि यह न सिर्फ शारीरिक शुद्धि प्रदान करता है बल्कि आत्मा और मन को भी पवित्र करता है। छोटी दीवाली का एक अन्य नाम ‘रूप चौदस’ भी है, और इस दिन को विशेष रूप से रूप-सौंदर्य की पूजा के लिए भी जाना जाता है।
स्नान करने से पहले पट्टे के नीचे तेल का एक दीया जलाया जाता है, जो एक प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान है। इसके बाद लोग सिर सहित पूरे शरीर को गर्म पानी से स्नान करते हैं। यह परंपरा यमराज के भय से बचने और जीवन में शांति और समृद्धि की प्राप्ति के लिए की जाती है।
पूजा की विधि
छोटी दीवाली के दिन भोजन से पहले पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन घर की समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए पूजा की जाती है। पूजा के लिए एक थाली में सामग्री एकत्रित की जाती है। थाली में एक कच्चा दीया, एक चौमुखा दीया और तेरह छोटे दीये रखे जाते हैं। इन सभी दीयों में तेल और बत्तियाँ डाली जाती हैं, ताकि पूजा के बाद इन दीयों को जलाया जा सके।
दीयों की पूजा के लिए विशेष सामग्री का उपयोग किया जाता है जैसे जल, रोली, चावल, गुड़, धूप, अबीर, गुलाल, फूल, चार सुहाली (एक प्रकार का पारंपरिक मीठा पकवान) और दक्षिणा (धन)। पूजा के दौरान गद्दी की पूजा पहले की जाती है, जो व्यापारिक गतिविधियों या संपत्ति की पूजा का प्रतीक है। उसके बाद घर के अंदर पूजा की जाती है। पूजा में दीये जलाने के बाद उन्हें घर के अलग-अलग हिस्सों में रख दिया जाता है जैसे रसोई, चौक, सीढ़ियाँ और सभी कमरों में ताकि घर में प्रकाश और समृद्धि का वास हो सके। गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्तियों के आगे धूप और दीप जलाकर पूजा संपन्न की जाती है।
इसे जरूर पढ़ें: पंच-देवों की पूजा और हिन्दू धर्म के मुख्य नियम
धन और समृद्धि की कामना
छोटी दीवाली पर की गई पूजा का उद्देश्य मुख्य रूप से धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति है। मान्यता है कि इस दिन जो भी पूजा की जाती है, उससे देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही इस दिन दीप जलाकर घर के हर कोने में रखा जाता है, ताकि घर में से अंधकार और बुरी शक्तियों का नाश हो सके।
नरक चतुर्दशी की कथा
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर नामक असुर का वध किया गया था, जो पाप और अंधकार का प्रतीक था। नरकासुर ने 16,100 स्त्रियों को बंदी बना रखा था, जिन्हें श्रीकृष्ण ने मुक्त कराया था। इस दिन को नरक से मुक्ति पाने और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन लोग बुराई का नाश करने और जीवन में सकारात्मकता और रोशनी लाने के लिए दीप जलाते हैं और यमराज के लिए दीपदान करते हैं, ताकि अकाल मृत्यु और नरक यातनाओं से मुक्ति मिल सके।
सांस्कृतिक महत्व
छोटी दीवाली को भारतीय संस्कृति में खास स्थान दिया गया है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक उल्लास, मिलन, और परिवार के साथ खुशियाँ बाँटने का दिन भी है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, दीप जलाते हैं और एक-दूसरे को मिठाइयाँ बाँटते हैं। यह दिन रिश्तों में मिठास और समाज में भाईचारे का प्रतीक भी है।
सारांश
छोटी दीवाली, जो मुख्य दीवाली के एक दिन पहले आती है, आत्मशुद्धि, रूप-निखार और समृद्धि की पूजा का पर्व है। इस दिन किए गए उबटन और स्नान से न केवल शरीर शुद्ध होता है, बल्कि आत्मा भी पवित्र होती है। दीयों की रोशनी से घर के अंधकार का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता का प्रवेश होता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अच्छाई और प्रकाश हमेशा उस पर विजय प्राप्त करते हैं।
इसे जरूर पढ़ें: पितृ-विसर्जन अमावस्या: पितरों की तृप्ति और आशीर्वाद प्राप्त करने का समय
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। यह सामग्री विभिन्न स्रोतों से संकलित की गई है और इसे केवल जानकारी के रूप में लिया जाना चाहिए। ये सभी बातें मान्यताओं पर आधारित है | adhyatmiaura.in इसकी पुष्टि नहीं करता |
Leave a Reply